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संयम का हर बांध बुरी तरह तोड़ा जा रहा है

Byadmin

May 7, 2021

संयम का हर बांध बुरी तरह तोड़ा जा रहा है…
इसलिए यह याद रहे कि गोधरा का जवाब किसी सरकार ने नहीं पूरे गुजरात ने दिया था। बंगाल का जवाब भी किसी सरकार को नहीं पूरे देश को पूरे देश में देना होगा…

अंतरराष्ट्रीय ख्याति वाले अत्यन्त शालीन पत्रकार स्वप्नदास गुप्ता इस बार बंगाल के चुनाव में तारकेश्वर सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। भयंकर तनातनी और तनाव के वातावरण में हुए चुनाव के दौरान भी स्वप्नदास गुप्त के धैर्य और संयम का बांध नहीं टूटा था। उनका पूरा चुनाव अभियान ममता बनर्जी की राजनीतिक प्रशासनिक विफलताओं/असफलताओं पर ही केंद्रित रहा था। लेकिन लगभग 90 हजार वोट पाकर भी स्वप्न दा 7484 वोट से चुनाव हार गए।

उनकी इस हार में उन लगभग 10% कट्टर धर्मांध अनपढ़ों जाहिलों गंवारों ने मुख्य भूमिका निभायी जो 130 फुट लम्बी हूरों के साथ सम्भोग के अश्लील सपने देखा करते हैं और 21वीं सदी के आधुनिक वैज्ञानिक युग में भी इस गंवारपन पर मजबूती से अड़े डटे हैं कि धरती गोल नही चपटी है, तेज हवा में वो कहीं उड़ ना जाए इसलिए पेपरवेट की तरह उस पर पहाड़ रख दिये गए हैं। जाहिर है कि ऐसे अजब गजब कट्टर धर्मांध अनपढ़ों जाहिलों गंवारों को पहले दिन से ही स्वप्नदास गुप्त सरीखे विद्वान विचारक में अपना सबसे बड़ा दुश्मन दिखायी देने लगा था। इसके बावजूद स्वप्नदास गुप्त ने अपनी चुनावी हार को भी बहुत गरिमा के साथ स्वीकार किया था।

लेकिन कल शाम को स्वप्नदास गुप्त के धैर्य और संयम का बांध बुरी तरह टूट गया। उन्होंने कल रात 9:34 बहुत गृहमंत्री को संबोधित कर बहुत साफ शब्दों में ट्वीट किया कि… बंगाल में स्थिति बहुत खतरनाक/चिंताजनक हो गयी है। बीरभूम जिले के नानूर इलाके में एक हजार से अधिक हिन्दू परिवार लुटेरों की भीड़ से बचने के लिए भाग कर खेतों में इकट्ठा हो गए हैं। औरतों के साथ अभद्रता और उससे भी बहुत बदतर हमले की खबरें आ रही हैं।

कल रात के बाद से वो लगातार ट्वीट कर के बंगाल में शुरू हो चुके कट्टर धर्मांध मजहबी रावण राज का सच देश और दुनिया को बता रहे हैं। आज सवेरे 9 बजे उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से स्थिति का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है।

ध्यान रहे कि स्वप्नदास गुप्त ने बहुत संयमित भाषा में अपनी बात कहने की कोशिश की है लेकिन उनके संयम का बांध इसके बावजूद टूट गया। उनके ट्वीट में लिखा गया “हिन्दू परिवार” शब्द शत प्रतिशत स्पष्ट कर रहा है कि हमलावर लुटेरों का मजहब क्या है।

हालांकि स्वप्नदास गुप्त ने संयम बरता लेक़िन भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के संयम का बांध इसलिए टूट गया क्योंकि उनके पास जो वीडियो पहुंचा उसमें सरेआम सड़क पर हिन्दू महिलाओं की इज्जत लूटने की कोशिश कर रहे लुटेरे बलात्कारी और उनका मजहब स्पष्ट पहचान में आ रहा है।

अतः उन्होंने खुलकर उन लुटेरे बलात्कारियों के मजहब को उजागर किया। यह संयम का बांध तोड़ देने की कोशिश है। यह राक्षसी कोशिश याद दिला रही है कि जिस तरह गोधरा का जवाब किसी सरकार ने नहीं पूरे गुजरात ने दिया था। बंगाल का जवाब भी किसी सरकार को नहीं पूरे देश को देना होगा।

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