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संविधान दिवस

Byadmin

Nov 26, 2021

:-: संविधान दिवस :-:
ऐसी व्यवस्था जिसमें सब लोग सत्य जानते हैं, लेकिन सत्य बोलते नहीं, वह लोकतांत्रिक संवैधानिक व्यवस्था हैं।इसमें न्यायाधीश, पुलिस, वक़ील, मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी,और आम जनता में सभी को एक दूसरे के बारे में पता होता हैं कि कौन सा व्यक्ति कितनी रिश्वत लेता हैं, कितना मिथ्या भाषण करता हैं,लेकिन फ़िर भी सभी सब कुछ जानते हुए भी,अपनी आंखों के सामने अधर्म होता हुआ देखते रहते हैं।जो लोग अधर्म,अनाचार को बढ़ावा देते हैं, उन्हें उतना ही मान सम्मान,पद प्रतिष्ठा, पुरुस्कार, सुविधाएं मिलती हैं और जो लोग सत्य का दामन थामते हैं, उन्हें षड्यंत्र, बदनामी,कुंठा,प्रताड़ना मिलती हैं।ऐसे लोग जो आपराधिक प्रवृत्ति के होते हैं, उन्हें भी शासन करने का अधिकार मिलता हैं।इसमें आम लोगों की कोई ग़लती नहीं होती,उन्हें तो जैसे नियम कानूनों में बांध दिया जाता हैं, वह लोग वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं।वर्तमान व्यवस्था का मूल सिद्धांत ही हैं कि अपराधी भले ही बच जाएं, निरपराध को दंड न मिलें,इसलिये अपराधी तो सब स्वतंत्र होते हैं, लेकिन निरपराध कुंठित होकर अपराधी बनने लगते हैं।सन 1950 के बाद ,वो लोग जिन्हें सही समय पर,और कहीं भी बिना रिश्वत दिए,न्याय मिला हो,केवल उन्हीं लोगों को संविधान दिवस की शुभकामनाएं औऱ 1950 के बाद संवैधानिक व्यवस्था के कारण कुंठाग्रस्त होकर हार मान चुके और इस मानसिक ग़ुलाम बनाने के लिए बनाई गई व्यवस्था के परिवर्तन के लिए तैयार रहें, क्योंकि अत्याचार, भ्रष्टाचार जितना बढ़ता हैं,उसका मतलब होता हैं कि उसका अंत निकट हैं।
धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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