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समान दंड व्यवस्था

Byadmin

May 21, 2022

:-: समान दंड व्यवस्था :-:
समाज में समानता लाने की जो बातें वर्तमान में की जाती हैं, वास्तव में वह अपराधियों को मिलने वाले दंड में समानता लाकर की गई ,जिसके लिए कहा गया कि कानून सबके लिए बराबर हैं जैसे कोई नेता या ias या सामान्य आदमी सभी को एक अपराध के लिए एकसमान दंड का प्रावधान किया गया जबकि मनुस्मृति में अपराधी के स्तर यानि मंत्री,ias, या सामान्य व्यक्ति के लिए अलग अलग दंड प्रावधान बनाया गया था।जो जितने ऊंचे स्तर को हो उसे उतना ही कठोर दंड मिले ,ऐसा मनुस्मृति का कथन हैं और वर्तमान व्यवस्था के अनुसार चाहे लालू हो या कालू हो,दोंनो के अपराध समान ,तो दंड भी समान ही रहेंगे।ऐसे में जो ऊंचे स्तर का हैं वो तो बच जाता हैं और जो नीचे स्तर का हैं वो फस जाता हैं।इस बात को जानते सब हैं ,स्वीकारते नहीं।दंड व्यवस्था में सबको एक समान करने से समाज अधर्म,भ्रष्टाचार बढ़ता हैं। समान दंड व्यवस्था धर्म व समाज के लिए घातक हैं। अंतिम विजय सत्य की ही होगी।
धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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