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साधु पुरुष की सबसे सरल पहचान क्या ?…

Byadmin

Feb 3, 2021

साधु पुरुष की सबसे सरल पहचान क्या ?…

बापू बोल …अरे मैं बोल बोल कर… घंटो तक साधु पुरुष… सद्गुरु के… बुद्ध पुरुष के लक्षणों के बारे में… पहचान के बारे में बोलता ही रहा ….आप कहते हैं साधु पुरुष की सबसे सरल पहचान क्या है ?…
सरल शब्द यूज़ किया है ….
जो सबसे सरल हो वो साधु ….

पत्नी जटिल है …आज के बच्चे जटिल हैं…. कोई फक्कड़ मिल जाए …कोई रुखड मिल जाए …सहज सरल …सहज सरल… वो साधु है ….

आपको किसी के निकट जाने के बाद …आपके मन के अनुभव में बात …कि इससे सरलता दुनिया में ज्यादा कहीं हो ही नहीं सकती… वो साधु …

आपकी आत्मा ये माने कि इस आदमी के मन में कभी कुटिलता हो ही नहीं सकती ….
और जिसको देखकर… पहचानने के बाद लगे कि उसको जिस हालत में रखो कायम संतोष है ….

साधु की आंख में पांच अमृत होता है …इसमें एक अमृत है संतोष ….इन निगाहों को देखें तो लगे कितनी तृप्त आंखें हैं…. उसको कोई वासना नहीं आंख में …..

कृष्ण प्रेम से भरी हुई…. कोई खाली जगह नहीं कि कुछ और अंदर आ सके ….ये पहला अमृत ….

साधु की आंख में सत्य का अमृत रहता है …आंखें कह देती है कि आदमी में भरपूर सत्य है …यहां झूठ को अवकाश नहीं ….

जिसकी आंख में कृष्ण नाम लेते ही अश्रुपात होने लगे… समझना …कोई साधु है …

परिपूर्ण नैन हो जाएं……

मानस निर्वाण
जय सियाराम

प्रश्न 2….

बापू … आप भी हम लोगों की तरह कभी बेचैन होते हैं ?….

बापू बोले … बेचैन हो हमारी बला …हम क्यों बेचैन होने लगे ?…हमारे पास उपाय है हरि नाम…

जिसको हरि नाम की बेचैनी लग गई उसको दुनिया की बेचैनी बेचैन नहीं कर सकती ….हरि नाम …..

हर पल चैन बरसता है ….
जंगल में जोगी बसता है…
कभी रोता है कभी हंसता है…..

स्वामी रामतीर्थ…..

हर पल चैन बरसता है …
मुझे बादल स्नान कराते हैं…
ये पंखी गीत सुनाते हैं …
ये पेड़ पौधे मेरे रिश्ते नाते हैं …
जंगल में जोगी बसता है ….
कभी रोता है …कभी हंसता है ….

मानस निर्वाण
जय सियाराम

प्रश्न 3….

मरने के बाद जो शांति मिलती है वो जीते जी कैसे मिले ?….

बापू बोले …. लेकिन आपको किसने खबर दी कि मरने के बाद शांति मिलती है ?…ये किसने अफवाह फैलाई है ?…

मरने के बाद शिष्टाचार है ..ॐ शांति ..ॐ शांति …ॐ शांति ….

एक नई यात्रा… वासना पुनर्जन्म देती है… मृत्यु से शांति मिल ही जाए तो तो बात खत्म…. उपन्यास का आखिरी पन्ना खत्म ….
लेकिन हमारे जीवन की किताब में आखिरी प्रकरण मृत्यु नहीं है ….जहां नवलकथा पूरी हो गई… फिर एक नई नवलकथा शुरू होती है….

जिसको वर्तमान में शांति ना मिले उसको मृत्यु के बाद क्या मिलेगी ?…

मानस निर्वाण
जय सियाराम

प्रश्न 4….

सत्य कड़वा क्यों होता है ?…

बापू बोले …सत्य कड़वा होता ही नहीं …उसको किया जा रहा है….

सत्य मधुर नहीं होता ?…
एक बच्चे ने भूल की… क्रोध करके थप्पड़ मारकर भी सुधारा जा सकता है ….लेकिन उसके गाल पर प्यार भरा हाथ घुमाकर… उसके सिर पर उंगली घुमाकर कह दे… बेटा …लाला… ऐसा नहीं करते …

मेरी संस्कृति कहती है… सत्यम ब्रूयात …प्रियं ब्रूयात… प्रिय सत्य बोल ….

लेकिन सत्य की दुहाई देने वाले ….”हम कड़वे लगते हैं… क्योंकि हम सत्यवादी हैं “….
नहीं ….सत्य कड़वा है ही नहीं… मेरी समझ में नहीं है…

और यदि दुनिया में है …तो मैं इसके पक्ष में नहीं हूँ ….

मधुर बोलो….

मानस निर्वाण
जय सियाराम

प्रश्न 5…

आपका भी …कभी ना कभी… किसी से तो झगड़ा हुआ होगा …..उस झगड़े का कारण क्या होता है ?…

बापू बोले ….अरे यार किससे ?….यहां किसको पत्थर मारें ?…यहां कौन पराया है ?…शीश महल में हर एक चेहरा अपना लगता है…. किससे झगड़ा करें ?….

मैं कभी किसीसे लड़ा नहीं ….

कोई लड़ता है तो मुझे आश्चर्य होता है …कोई किसीको थप्पड़ मारे तो मुझे रोना आता है कि ये कैसे हो सकता है ?… ये कौन से केमिकल्स अंदर आ गए कि एक आदमी आदमी को पीटने लगे ?…

किससे झगड़ा करें ?…..जय सियाराम

संपादक

प्रज्ञा शर्मा

मुरैना (ग्वालियर)म0प्र0

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