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सुंदरकांड का नाम सुंदरकांड क्यों रखा गया ?

Byadmin

Jul 21, 2021

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1 :- सुंदरकांड का नाम सुंदरकांड क्यों रखा गया ?

हनुमानजी, सीताजी की खोज में लंका गए थें और लंका त्रिकुटाचल पर्वत पर बसी हुई थी ! त्रिकुटाचल पर्वत यानी यहां 3 पर्वत थें !

पहला सुबैल पर्वत,
जहां कें मैदान में युद्ध हुआ था !

दुसरा नील पर्वत,
जहां राक्षसों कें महल बसें हुए थें ! और

तीसरे पर्वत का नाम है सुंदर पर्वत, जहां अशोक वाटिका नीर्मित थी ! इसी वाटिका में हनुमानजी और सीताजी की भेंट हुई थी !

इस काण्ड की यहीं सबसें प्रमुख घटना थी , इसलिए इसका नाम सुंदरकांड रखा गया है !

2 :- शुभ अवसरों पर ही सुंदरकांड का पाठ क्यों ?

शुभ अवसरों पर गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस कें सुंदरकांड का पाठ किया जाता हैं ! शुभ कार्यों की शुरूआत सें पहलें सुंदरकांड का पाठ करनें का विशेष महत्व माना गया है !
जबकि किसी व्यक्ति कें जीवन में ज्यादा परेशानीयाँ हो , कोई काम नहीं बन पा रहा हैं, आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या हो , सुंदरकांड कें पाठ से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते है, कई ज्योतिषी या संत भी विपरित परिस्थितियों में सुंदरकांड करने की सलाह देते हैं !

3 :- जानिए सुंदरकांड का पाठ विषेश रूप सें क्यों किया जाता हैं ?

माना जाता हैं कि सुंदरकांड कें पाठ सें हनुमानजी प्रसन्न होते है !
सुंदरकांड के पाठ से बजरंगबली की कृपा बहुत ही जल्द प्राप्त हो जाती हैं !
जो लोग नियमित रूप सें सुंदरकांड का पाठ करतें हैं , उनके सभी दुख दुर हो जातें हैं , इस काण्ड में हनुमानजी ने अपनी बुद्धि और बल सें सीता की खोज की हैं !
इसी वजह सें सुंदरकांड को हनुमानजी की सफलता के लिए याद किया जाता

4 :- सुंदरकांड सें मिलता हैं मनोवैज्ञानिक लाभ ?

वास्तव में श्रीरामचरितमानस कें सुंदरकांड की कथा सबसे अलग हैं , संपूर्ण श्रीरामचरितमानस भगवान श्रीराम कें गुणों और उनके पुरूषार्थ को दर्शाती हैं , सुंदरकांड ऐक मात्र ऐसा अध्याय हैं जो श्रीराम के भक्त हनुमान जी की विजय का काण्ड हैं !
मनोवैज्ञानिक नजरिए सें देखा जाए तो यह आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला काण्ड हैं , सुंदरकांड के पाठ सें व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्त होती हैं , किसी भी कार्य को पुर्ण करनें के लिए आत्मविश्वास मिलता हैं !

5 :- सुंदरकांड सें मिलता है धार्मिक लाभ ?

सुंदरकांड के लाम से मिलता हैं धार्मिक लाभ हनुमानजी की पूजा सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वालीं मानी गई हैं , बजरंगबली बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं , शास्त्रों में इनकी कृपा पाने के कई उपाय बताएं गए हैं , इन्हीं उपायों में सें ऐक उपाय सुन्दरकाण्ड का पाठ करना हैं , सुंदरकांड के पाठ से हनुमानजी के साथ ही श्रीराम की भी विषेश कृपा प्राप्त होती हैं !

किसी भी प्रकार की परेशानी हो सुंदरकांड के पाठ से दूर हो जाती हैं , यह ऐक श्रेष्ठ और सरल उपाय है , इसी वजह से काफी लोग सुंदरकांड का पाठ नियमित रूप से करते हैं , हनुमानजी जो समुद्र को लांघकर लंका पहुंच गए वहां सीता की खोज की , लंका को जलाया सीता का संदेश लेकर श्रीराम के पास लौट आए , यह ऐक भक्त की जीत का काण्ड हैं , जो अपनी इच्छाशक्ति के बल पर इतना बड़ा चमत्कार कर सकता है , सुंदरकांड में जीवन की सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र भी दिए गए हैं , इसलिए पूरी रामायण में सुंदरकांड को सबसे श्रेष्ठ माना जाता हैं , क्योंकि यह व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ाता हैं , इसी वजह सें सुंदरकांड का पाठ विषेश रूप सें किया जाता हैं !!

जय श्री राम !
जय श्री राम !
जय श्री राम !
जय श्री राम !
जय श्री राम !

जय जय जय सियाराम !
सियाराम जय जय राम !

सीता राम
सीता राम
सीता राम

जय श्री राम भक्त हनुमानजी नमो नमः !!

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