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:-: सुपर्णखा :-:
सुपर्णखा का वास्तविक नाम मीनाक्षी था,नाक कटने के बाद,उसके नाक वाला स्थान सुपड़े के समान दिखने लगा था,इसलिये उसका उपनाम सुपर्णखा पड़ गया।रावण की सेना के सैनिक विद्दुतज्ज्ह से वह प्रेम करती थी,जिसे रावण ने मरवा दिया था।कामातुर होकर उसने श्रीराम से विवाह प्रस्ताव रखा,जिसे उन्होंने मना किया,फ़िर वह लक्ष्मण को देखकर मोहित हो गई और अपने आप पर नियंत्रण खोकर,उनके साथ जबरदस्ती करने लगी,तब आत्म सम्मान की रक्षा में ,उन्होंने उसकी नाक काट दी।सनातन धर्म में पुरुष द्वारा दुष्कर्म करने पर उसे नपुंसक बना दिया जाता था और महिला द्वारा दुष्कर्म करने पर उसकी नाक काट दी जाती थी।रावण प्रशंसक वर्तमान व्यवस्था में तो महिला द्वारा,आरोप लगाने पर ही ,पुरुष को अपराधी मान लिया जाता हैं,इसलिये आजकल पुरुष आयोग की मांग की जा रही हैं।लेकिन सनातन व्यवस्था में महिला पुरुष दोनों अपराध करने पर समान दण्ड का अधिकार था।रावण ने सबकुछ जानते हुए और परिजनों के समझाने के बाद भी,लक्ष्मण से बदला लेने के स्थान पर सीताहरण किया,जिसका उसे दंड मिला।
सुपर्णखा प्रतीक हैं ऐसी महिलाओं का जो अपने निज स्वार्थ की पूर्ति के लिए,पुरूषों को केवल उपभोग की वस्तु समझकर उनपर अपना अधिकार समझती हैं।सोचिए लंका के महलों में रहने वाली को,लंका से दूर,सुनसान जंगल में ,अकेले घूमने फिरने का अधिकार तो था,लेकिन किसी परपुरुष पर,बलपूर्वक अपनी इच्छा थोंपने का नहीं।सनातन संस्कृति में महिला पुरुष दोनों का ही आत्म सम्मान और अधिकार बराबर हैं।जीत सत्य की ही होगी।
धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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