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हमारे पास तो पहले से ही अमृत से भरे कलश थे..फिर हम वह अमृत फेंक कर उनमें कीचड़ भरने का काम क्यों कर रहे हैं…?🤔*

Byadmin

Jun 27, 2021

हमारे पास तो पहले से ही अमृत से भरे कलश थे..फिर हम वह अमृत फेंक कर उनमें कीचड़ भरने का काम क्यों कर रहे हैं…?🤔*

जरा इन पर विचार करें…🧐👇

० यदि मातृनवमी थी,
तो Mother’s day क्यों लाया गया?

० यदि कौमुदी महोत्सव था,
तो Valentine day क्यों लाया गया?

० यदि गुरुपूर्णिमा थी,
तो Teacher’s day क्यों लाया गया?

० यदि धन्वन्तरि जयन्ती थी,
तो Doctor’s day क्यों लाया गया?

० यदि विश्वकर्मा जयंती थी,
तो Technology day क्यों लाया गया?

० यदि सन्तान सप्तमी थी,
तो Children’s day क्यों लाया गया?

० यदि नवरात्रि और कन्या भोज था,
तो Daughter’s day क्यों लाया गया?

रक्षाबंधन है तो Sister’s day क्यों ?

भाईदूज है तो Brother’s day क्यों ?

आंवला नवमी, तुलसी विवाह मनाने वाले हिंदुओं को Environment day की क्या आवश्यकता ?

० केवल इतना ही नहीं, नारद जयन्ती ब्रह्माण्डीय पत्रकारिता दिवस है…

पितृपक्ष ७ पीढ़ियों तक के पूर्वजों का पितृपर्व है…

नवरात्रि को स्त्री के नवरूपों के दिवस के रूप में स्मरण कीजिये…

*सनातन पर्वों को गर्व से मनाईये…
पश्चिमी अंधानुकरण मत अपनाइये
ध्यान रखे…
” सूर्य जब भी पश्चिम में गया है तब अस्त ही हुआ है “

अपनी संस्कारी जड़ों की ओर लौटिए। अपने सनातन मूल की ओर लौटिए। व्रत, पर्व, त्यौहारों को मनाइए। अपनी संस्कृति और सभ्यता को जीवंत कीजिये।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

० यदि मातृनवमी थी,
तो Mother’s day क्यों लाया गया?

० यदि कौमुदी महोत्सव था,
तो Valentine day क्यों लाया गया?

० यदि गुरुपूर्णिमा थी,
तो Teacher’s day क्यों लाया गया?

० यदि धन्वन्तरि जयन्ती थी,
तो Doctor’s day क्यों लाया गया?

० यदि विश्वकर्मा जयंती थी,
तो Technology day क्यों लाया गया?

० यदि सन्तान सप्तमी थी,
तो Children’s day क्यों लाया गया?

० यदि नवरात्रि और कन्या भोज था,
तो Daughter’s day क्यों लाया गया?

रक्षाबंधन है तो Sister’s day क्यों ?

भाईदूज है तो Brother’s day क्यों ?

आंवला नवमी, तुलसी विवाह मनाने वाले हिंदुओं को Environment day की क्या आवश्यकता ?

० केवल इतना ही नहीं, नारद जयन्ती ब्रह्माण्डीय पत्रकारिता दिवस है…

पितृपक्ष ७ पीढ़ियों तक के पूर्वजों का पितृपर्व है…

नवरात्रि को स्त्री के नवरूपों के दिवस के रूप में स्मरण कीजिये…

*सनातन पर्वों को गर्व से मनाईये…
पश्चिमी अंधानुकरण मत अपनाइये
ध्यान रखे…
” सूर्य जब भी पश्चिम में गया है तब अस्त ही हुआ है “

अपनी संस्कारी जड़ों की ओर लौटिए। अपने सनातन मूल की ओर लौटिए। व्रत, पर्व, त्यौहारों को मनाइए। अपनी संस्कृति और सभ्यता को जीवंत कीजिये।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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