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हम इस संदेश को एक जातक कथा के माध्यम से समझ सकते हैं।

Byadmin

Sep 6, 2021

हम इस संदेश को एक जातक कथा के माध्यम से समझ सकते हैं।
जातक कथा है कि किसी समय एक राजा के बगीचे में बहुत सारे बंदर रहते थे। उन बंदरों में एक दुष्ट बंदर भी था। दुष्ट बंदर अपने पांच साथियों के मिलकर हमेशा शरारत करता रहता था। वह दूसरों को परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड़ता था।
एक दिन राजपुरोहित बगीचे में विचरण कर रहा था। इस दौरान दुष्ट बंदर ने जाकर उसके सिर पर पंजा मार दिया। जब राजपुरोहित ने दुष्ट बंदर को देखा तो वह हंसने लगा। दुष्ट बंदर को हंसते देख राजपुरोहित ने उसे सबक सिखाने की बात कही। राजपुरोहित की बात सुनकर दुष्ट बंदर के साथ-साथ उसके पांच साथी भी हंसने लगे। दुष्ट बंदर की शरारत के बारे में जब एक बुद्धिमान बंदर को पता चला तो उसने सभी बंदरों से वह जगह छोड़कर जाने के लिए कह दिया। बुद्धिमान बंदर की बात सुनकर सभी बंदर राजा का बगीचा छोड़कर चले गए, लेकिन दुष्ट बंदर और उसके साथी बगीचे में ही रहे।
एक दिन राजा के हाथियों के अस्तबल में आग लग गई। इससे राजा के कई हाथी जल गए। राजा ने अपने हाथियों का उपचार करने के लिए एक सभा बुलाई और सभी से हाथियों को जल्द स्वस्थ करने के सुझाव मांगे। इस दौरान राजपुरोहित ने दुष्ट बंदर से बदला लेने के लिए राजा को सुझाव दिया कि महाराज! बंदरों की चर्बी हाथियों के घाव के लिए मरहम का काम करती है। राजपुरोहित की बात सुनकर राजा ने अपने सैनिकों को बंदरों की चर्बी लाने का आदेश दिया। राजा का आदेश मिलते ही सैनिक बगीचे में गए और दुष्ट बंदर व उसके पांचों साथियों का अंत कर दिया। इस तरह दुष्ट बंदर व उसके साथियों को अपने बुरे कर्मों की सजा मिली, जबकि अन्य बंदर अपनी समझदारी के कारण शेष जीवन का आनंद उठाते रहे।
हमें कभी भी बिना वजह किसी को परेशान नहीं करना चाहिए और ना ही किसी की हंसी उड़ानी चाहिए, क्योंकि हमें अपने बुरे कर्मों की सजा अवश्य मिलती है।

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