• Sun. Jun 26th, 2022

सभी हिन्दुओं और सिखों से अनुरोध है

Byadmin

Dec 2, 2020

खालसा पन्थ की स्थापना के समय ब्राह्मण, हिन्दू खत्री आगे आये थे। हर हिन्दू ने अपने परिवार का बड़ा बेटा खालसा फौज के लिए दिया था। एक ओर जहां मराठे लड़ रहे थे, वहीं दूसरी और राजपूतों और ब्राह्मणों ने मुगलों की नाक में दम किया हुआ था। जब पहली खालसा फ़ौज बनी तब उसका नेतृत्व एक ब्राह्मण भाई प्राग दास जी के हाथ में था। उसके बाद उनके बेटे भाई मोहन दास जी ने कमान सम्भाली। सती दास जी, मति दास जी, दयाल दास जी जैसे वीर शहीद ब्राह्मण खालसा फ़ौज के सेनानायक थे। इन्होंने गुरु जी की रक्षा करते हुए अपनी जान दी। गुरु गोविन्द सिंह जी को शस्त्रों की शिक्षा देने वाले पण्डित कृपा दत्त जी भी एक ब्राह्मण थे, उनसे बड़ा योद्धा कभी पंजाब के इतिहास में नही देखा गया। जब 40 मुक्ते मैदान छोड़ कर भागे तब एक बैरागी ब्राह्मण लक्ष्मण दास जी उर्फ बन्दा बहादुर जी और उसका 14 साल के बेटे अजय भरद्वाज ने गुरु जी के परिवार की रक्षा के लिए सरहिंद में लड़ाई की। चप्पड़ चिड़ी की लड़ाई में उनकी इतिहासिक विजय हुई। 1906 में खालसा पन्थ सिख धर्म बना। अकाली लहर चला कर उसे हिन्दू धर्म से कुछ लोगों ने अलग कर दिया। इतिहास से छेड़छाड़ हुई पर सच्चाई कभी बदल नही सकती। सभी हिन्दू और सिखों से अनुरोध है कि आप हिन्दू सिखों की सांझी विरासत को पहचानिए और हमारा असली इतिहास जिसे बिकाऊ वामपंथी इतिहासकारों ने मिटा दिया वो सबके सामने आये।

संपादक

अशोक पटेरिया

छतरपुर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

AllEscort