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6 days War में अरब देशों के हारने के बाद , फलिस्तीन रिफ्युजीस का प्रोपेगेडा किया गया

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May 23, 2021

6 days War में अरब देशों के हारने के बाद , फलिस्तीन रिफ्युजीस का प्रोपेगेडा किया गया … उस समय इजिप्ट के प्रेसिडेंट जमाल अब्देल नासेर ने कहा ,

यदि सारे शरणार्थी इज़राइल लौट जाए , तो इज़राइल का अस्तित्व अपने आप समाप्त हो जाएगा।
~ गमाल अब्देल नासेर
(Former President of Egypt)

Ref:- ए मैंडेट फॉर टेरर: द यूनाइटेड नेशंस एंड द पीएलओ (1989) में उद्धृत किया गया है, हैरिस ओ. स्कोनबर्ग द्वारा, 239 Page

फिलिस्तीन नामक क्षेत्र में वर्तमान इज़राइल और जॉर्डन के क्षेत्र शामिल हैं । ब्रिटेन से पहले 1517 से 1917 तक इस क्षेत्र का अधिकांश भाग ओटोमन साम्राज्य के शासन के अधीन रहा ।

प्रथम विश्व युद्ध के अंत में तुर्क साम्राज्य को भंग कर दिया गया था । इसके उत्तराधिकारी, तुर्की के आधुनिक गणराज्य ने प्रथम विश्व युद्ध के बाद हुए लॉज़ेन समझौते के तहत फिलिस्तीन को ब्रिटिश साम्राज्य नियंत्रण में स्थानांतरित कर दिया था ।

1917 में ग्रेट ब्रिटेन ने “यहूदी लोगों के लिए एक राष्ट्रीय देश की फिलिस्तीन में स्थापना” के लिए बाल्फोर घोषणा जारी की। 1922 में ब्रिटेन ने लगभग 80% फिलिस्तीन को ट्रांसजॉर्डन को आवंटित किया। इस प्रकार, जॉर्डन ब्रिटिश जनादेश के तहत फिलिस्तीन की अधिकांश भूमि को कवर करता है। जॉर्डन में वहां रहने वाले अधिकांश अरब भी शामिल हैं। दूसरे शब्दों में, जॉर्डन फिलिस्तीन का अरब हिस्सा है ।

फिलिस्तीन के निवासियों को “फिलिस्तीनी” कहा जाता है। चूंकि फिलिस्तीन में आधुनिक समय इजरायल और जॉर्डन दोनों शामिल हैं, इसलिए इस क्षेत्र के अरब और यहूदी दोनों निवासियों को “फिलिस्तीनी” कहा जाता था ।

यहूदियों द्वारा अपनी ऐतिहासिक मातृभूमि यहूदिया और सामरिया में फिर से वापस बसने के बाद ही, एक अरब फ़िलिस्तीनी राष्ट्र का मिथक दुनिया भर में बनाया और बेचा गया ।

इजराइल ने अपने 8 लाख 20 हजार शरणार्थियों को नागरिकता दी , यहां तक 1 लाख 60 अरब शरणार्थियों को भी नागरिकता दी । लेकिन अरब देशों ने किसी भी शरणार्थी को नागरिकता नही दी , इसका कारण क्या था ?

1952 में जॉर्डन में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा फलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए बनी UNRWA के तत्कालीन निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अलेक्जेंडर गैलोवे ने कहा ,

“यह बिल्कुल स्पष्ट है कि अरब देश अपने अरब शरणार्थियों की समस्या का समाधान नहीं करना चाहते हैं । वे इसे एक खुले घाव के रूप में, संयुक्त राष्ट्र के खिलाफ एक अपमान के रूप में और इजरायल के खिलाफ एक हथियार के रूप में रखना चाहते हैं। अरब नेता इस बात की परवाह नहीं करते कि शरणार्थी जीते हैं या मरते हैं ।

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