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हम ही राम हम ही कृष्ण

Byadmin

Sep 14, 2021

:-: हम ही राम,हम ही कृष्ण :-:
श्रीराम की मर्यादा,श्रीकृष्ण का प्यार हैं। सनातन कोई पंथ नहीं, जीवन का सार हैं।
युग-युग करके युग बीतें,पर समय न बदला हैं।
सत्य की नींव का,प्रेम ही आधार हैं।

इस संसार की सारी वैभवता,केवल तब तक हैं, जब तक शरीर में प्राण हैं, निष्प्राण होने पर आत्मा भी पराई हो जाती हैं।अपने धर्म के बिना ,किसी भी जीव का कोई अस्तित्व नहीं और जो अपने धर्म के लिये ही न लड़ा हो,ऐसा जीव जीवित होकर भी मृतक के समान हैं।मन की तरंगों को अनुभव करके,अपने अंदर के राम और कृष्ण को पहचान कर,धर्म के लिये जो त्याग उन्होंने दिया,उतना तो हम नहीं कर सकते,लेकिन धर्मरक्षा के लिये, उनके द्वारा बताएं गये मार्ग पर चलकर और साथ ही दूसरों को भी प्रेरित करके,अपने आत्मीय आनंद को अवश्य बढ़ा सकते हैं।हो सकता हैं कि शबरी जैसा हमारा भाग्य न हो कि भगवान स्वयं चलकर हमारें पास आए, लेकिन फ़िर भी हमारा कर्तव्य हैं कि हम धैर्य के साथ ,निःस्वार्थ भाव से अपना कर्म करते हुए,अपने सामने अपना सम्मान बनायें रखने के लिये सनातन धर्म के लिये लोगों के मन में एक दीपक जलानें का प्रयास अवश्य करें, जिससे सनातन के प्रति एक सकारात्मक वातावरण निर्मित हो सकें और धर्म स्थापना के इस पावन कार्य में गिलहरी के समान ही सही,पर छोटा सा योगदान देनें के लिये आगे अवश्य आयें।
धन्यवाद :- बदला नहीं बदलाव चाहिए

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